Sunday, October 21, 2012

108 का रहस्य ! (The Mystery of 108) : श्री सिद्धार्थ शर्मा, कटक

108 का रहस्य ! 
(The Mystery of 108)


वेदान्त में एक मात्रकविहीन सार्वभौमिक ध्रुवांक 108 का उल्लेख मिलता है जिसका हजारों वर्षों पूर्व हमारे ऋषियों (वैज्ञानिकों) ने अविष्कार किया था l 

मेरी सुविधा के लिए मैं मान लेता हूँ कि, 108 = ॐ (जो पूर्णता का द्योतक है)

प्रकृति में 108 की विविध अभिव्यंजना :

1. सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी/सूर्य का व्यास = 108 = 1 ॐ

150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (पृथ्वी और सूर्य के बीच 108 सूर्य सजाये जा सकते हैं)

2. सूर्य का व्यास/ पृथ्वी का व्यास = 108 = 1 ॐ

1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 ॐ
सूर्य के व्यास पर 108 पृथ्वियां सजाई सा सकती हैं .

3. पृथ्वी और चन्द्र के बीच की दूरी/चन्द्र का व्यास = 108 = 1 ॐ
384403 km/3474.20 km = 108 = 1 ॐ
पृथ्वी और चन्द्र के बीच १०८ चन्द्रमा आ सकते हैं .

4. मनुष्य की उम्र 108 वर्षों (1ॐ वर्ष) में पूर्णता प्राप्त करती है .
वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य को अपने जीवन काल में विभिन्न ग्रहों की 108 वर्षों की अष्टोत्तरी महादशा से गुजरना पड़ता है .

5. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति 200 ॐ श्वास लेकर एक दिन पूरा करता है .

1 मिनट में 15 श्वास >> 12 घंटों में 10800 श्वास >> दिनभर में 100 ॐ श्वास, वैसे ही रातभर में 100 ॐ श्वास

6. एक शांत, स्वस्थ और प्रसन्न वयस्क व्यक्ति एक मुहुर्त में 4 ॐ ह्रदय की धड़कन पूरी करता है .

1 मिनट में 72 धड़कन >> 6 मिनट में 432 धडकनें >> 1 मुहूर्त में 4 ॐ धडकनें ( 6 मिनट = 1 मुहूर्त)

7. सभी 9 ग्रह (वैदिक ज्योतिष में परिभाषित) भचक्र एक चक्र पूरा करते समय 12 राशियों से होकर गुजरते हैं और 12 x 9 = 108 = 1 ॐ

8. सभी 9 ग्रह भचक्र का एक चक्कर पूरा करते समय 27 नक्षत्रों को पार करते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 27 x 4 = 108 = 1 ॐ

9. एक सौर दिन 200 ॐ विपल समय में पूरा होता है. (1 विपल = 2.5 सेकेण्ड)

1 सौर दिन (24 घंटे) = 1 अहोरात्र = 60 घटी = 3600 पल = 21600 विपल = 200 x 108 = 200 ॐ विपल

*** 108 का आध्यात्मिक अर्थ ***

1 सूचित करता है ब्रह्म की अद्वितीयता/एकत्व/पूर्णता को

0 सूचित करता है वह शून्य की अवस्था को जो विश्व की अनुपस्थिति में उत्पन्न हुई होती

8 सूचित करता है उस विश्व की अनंतता को जिसका अविर्भाव उस शून्य में ब्रह्म की अनंत अभिव्यक्तियों से हुआ है .
अतः ब्रह्म, शून्यता और अनंत विश्व के संयोग को ही 108 द्वारा सूचित किया गया है .

जिस प्रकार ब्रह्म की शाब्दिक अभिव्यंजना प्रणव ( अ + उ + म् ) है और नादीय अभिव्यंजना ॐ की ध्वनि है उसी प्रकार ब्रह्म की गाणितिक अभिव्यंजना 108 है .


*** The Mystery of 108 ***


There is a dimensionless universal constant, 108, which has been mentioned in the Vedanta and discovered by our ancient Rishis (Scientists) thousands of years ago.

For my convenience, let me take 108 = Om and it stands for the perfection/ completeness.

Various manifestations of Om in Nature:

1. The distance between sun and earth/the diameter of the sun = 108 = Om

150,000,000 km/1,391,000 km = 108 (108 suns can occupy the distance between the sun and the earth.)

2. The diameter of sun/diameter of earth = 108 = 1 Om
1,391,000 km/12,742 km = 108 = 1 Om
The sun can occupy 108 earths on its diameter.

3. Distance between earth and moon/diameter of moon = 108 = 1 Om
384403 km/3474.20 km = 108 = 1 Om
The moon walks 108 steps to meet mother earth.

4. Age of Man completes in 108 years (1 Om years)
According to Astrology a man undergoes the Ashtottari Mahadasha (total of which is 108 years) of the planets in his life time.

5. A calm, healthy and happy adult person completes a day by taking 200 Om breaths (100 Om during the day and 100 Om during the night).
15 breaths in 1 minute >> 10800 breaths in 12 hours >> 100 Om breaths in a day/night.

6. The heart of a calm, healthy and happy adult man beats 4 Om times in 1 Muhurt.

72 beats in 1 munute >> 432 beats in 6 minutes >> 4x108 beats in 6 minutes >> 4 Om beats in 1 Muhurt (6 munutes ).

7. The 9 planets (the Grahas as defined in Vedic Astrology) complete one revolution around the Bhachakra covering 12 Rashis (Signs) and 12x9 =108 =1 Om.

8. The 9 planets complete one revolution around the Bhachakra covering 27 Nakshatras (Lunar Mansions) and each Nakshatra consists of 4 Charans and 27 x 4 = 108 = 1 Om.

9. A solar day completes in 200 Om Vipals. There are 100 Om Vipal in a day and 100 Om Vipal in a night. (1 second = 2.5 Vipal)

1 Solar day (24 Hours) = 1 Ahoratra = 60 Ghatis = 3600 Pal = 21600 Vipal = 200 x 108 Vipal = 200 Om Vipal

The Metaphysical interpretation of 108

1 stands for the uniqueness/oneness/perfection/completeness of the Brahma.

0 stands for the state of emptiness which would have been prevailed if the universe had not been existed.

8 stand for the infinity of the universe which has evolved from the various manifestation of the Brahma in the emptiness.

Therefore 108 is the union of the Brahma, the emptiness and the infinite universe.

As the literal interpretation of the Brahma is the Pranav (a + u +m) and its acoustic manifestation is the echo of the sound ‘Om’, similarly the mathematical denotation of the Brahma is 108.


असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माsमृतं गमय l

ॐ शांति : शांति : शांति : l

हे प्रभु ! तू मुझे असत्य से सत्य की ओर ले जा, अज्ञान रुपी अँधेरे से ज्ञान रुपी प्रकाश में लेजा और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जा l


जय श्री कृष्ण !
सिद्धार्थ शर्मा, कटक
21 October, 2012

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