Tuesday, April 17, 2012

त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग : वंदे मातृ संस्कृति'

वंदे मातृ संस्कृति's


त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग (भाग 1 ) ...

गोदावरी के उद्गगम स्थल के समीप (महाराष्ट्र के नासिक में) श्री त्र्यम्बकेश्वर शिव स्थित हैं... ऋषि गौतम और पवित्र नदी गोदावरी की प्रार्थना पर ही भगवान शिव ने इस स्थान पर अपने वास की स्वीकृति दी थी... गौतमी तट पर स्थित इस त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग का जो मनुष्य भक्तिभाव पूर्वक दर्शन पूजन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है... वही भगवान शिव ‘त्र्यम्बकेश्वर’ नाम से इस जगत में विख्यात हुए...

यहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग का प्रत्यक्ष दर्शन स्त्रियों के लिए निषिद्ध है, अत: वे केवल भगवान के मुकुट का दर्शन करती हैं। त्र्यम्बकेश्वर-मन्दिर में सर्वसामान्य लोगों का भी प्रवेश न होकर, जो द्विज (ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य) हैं तथा भजन-पूजन करते हैं और पवित्रता रखते हैं, वे ही लोग मन्दिर के अन्दर प्रवेश कर पाते हैं। इनसे अतिरिक्त लोगों को बाहर से ही मन्दिर का दर्शन करना पड़ता है।

शिव पुराण के अनुसार...

एक बार महर्षि गौतम के तपोवन में रहने वाले ब्राह्मणों की पत्नियां किसी बात पर उनकी पत्नी अहिल्या से नाराज हो गईं। उन्होंने अपने पतियों को ऋषि गौतम का अहित करने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए उन ब्राह्मणों ने भगवान गणेश की आराधना की।

उनकी आराधना से प्रसन्न होकर गणेशजी ने उनसे वर मांगने को कहा तो ब्राह्मणों ने ऋषि गौतम की अनिष्ट की कामना करते हुए, उन्हें आश्रम से बाहर निकालने के लिए वर मांगा। गणेशजी को विवश होकर उन ब्राह्मणों की बात माननी पड़ी।

एक दिन जब गौतम ऋषि खेत में व्रीही लेने गए थे, तब भगवान गणेश ने एक दुर्बल गाय का रूप धारण करके उसी खेत में जाकर फसल चरने लगे जहां ऋषि गए हुए थे। खेत में गाय को चरते देख ऋषि ने हाथ में तृण लेकर उसे हांकने लगे। तृणों का स्पर्श होते ही वह गाय गिरकर मर गई। गाय के मरने के बाद सारे ब्राह्मण एकत्र होकर ऋषि गौतम को गो-हत्यारा कहकर भर्त्सना करने लगे।

तब ऋषि गौतम ने उन ब्राह्मणों से प्रायश्चित करते हुए अपने उद्धार का उपाय पूछा।ब्राह्मणों ने गौतम ऋषि से कहा कि तुम अपने पाप को सर्वत्र सबको बताते हुए तीन बार पृथ्वी की परिक्रमा करो। उसके बाद लौटकर यहां एक महीने तक व्रत करो, व्रत के बाद 'ब्रह्मगिरी' की 101 बार परिक्रमा करो तभी तुम्हारी शुद्धि होगी। अथवा यहां गंगाजी को लाकर उनके जल से स्नान करो। साथ ही सौ घड़ों के पवित्र जल से एक करोड़ पार्थिव शिवलिंगों को स्नान कराके उसका पूजन व ब्रह्मगिरी की 11 बार परिक्रमा करो। उसके बाद ही तुम्हारा उद्धार होगा।

ब्राह्मणों के बताये हुए उपाय के अनुसार महर्षि गौतम ने सारे कार्यों को पूरा किया। उसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ भगवान शिव की आराधना करने लगे। उसकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शिव वहां प्रकट हुए और उससे वर मांगने को कहा कि तब महर्षि गौतम ने कहा भगवान आप मुझे गो-हत्या के पाप से मुक्त कर दें। भगवान शिव ने उनसे कहा कि तुम सर्वथा निष्पाप हो और गो-हत्या का अपराध तुम पर छलपूर्वक लगाया गया था।

भगवान की ऐसी बात सुनकर गौतम ने शिवजी से सदैव वहीं रहने के लिए प्रार्थना की। शिवजी ने गौतम की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और वहां त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से स्थित हो गए। गौतम त्रषि द्वारा लाई गई गंगाजी बाद में गोदावरी नाम से प्रसिद्ध हुईं।

ॐ नमः शिवाय...
by: वंदे मातृ संस्कृति

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