Monday, August 13, 2012

वेदों में विज्ञान !!! श्री सिद्धार्थ शर्मा , कटक


वेदों में विज्ञान !!! वैदिक युग की महान भारतीय प्रतिभाओं ने हजारों वर्षों पूर्व प्रकाश के वेग का आकलन कर लिया था . ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 50 वें सूक्त को पढ़ें -- योजनानां सहस्त्रं द्वे, द्वे शते , द्वे च योजने एकेन निमिषार्द्धेन क्रममाण नमोsस्तुते l l अर्थ - मैं उस प्रकाश शक्ति (सूर्य) को नमस्कार करता हूँ जो आधे निमिष में 2202 योजन की दूरी तय करता है l अब, 1 योजन = 4 कोश (या, क्रोश) = 4 x 8000 गज (1कोश =8000 गज) = 32000 x 0.9144 मीटर (1गज=0.9144मी.) = 29260.8 मीटर 4404 योजन = 4404 x 29260.8 मीटर = 128864563.2 मीटर निमिष की परिभाषा श्रीमद्भागवत में इस प्रकार है -- 1 अहोरात्र = 30 मूहूर्त = 30 x 30 लघु (1 मुहूर्त = 30 लघु) = 30x30x15 काष्ठ (1 लघु = 15 काष्ठ) = 30x30x15x15 निमिष (1काष्ठ =15निमिष) = 202500 निमिष 202500 निमिष = 1 अहोरात्र = 24 घंटे = 24x60x60 सेकेण्ड = 86400 सेकेण्ड 1 निमिष = 202500/86400 = 32/75 सेकेण्ड प्रकाश का वेग = आधे निमिष में 2202 योजन = एक निमिष में 4404 योजन = 32/75सेकेण्ड में 128864563.2 मीटर = 302026320 मीटर प्रति सेकेण्ड = 302026.32 कि मी प्रति सेकेण्ड = 3 लाख कि मी प्रति सेकेण्ड आधुनिक वैज्ञानिकों द्वारा 1983 में प्रकाश के वेग को सही सही निर्धारित किया गया था और उसका मान है = 299792458 मीटर प्रति सेकेण्ड यानि, 3 लाख कि मी प्रति सेकेण्ड श्रम हो किसी का, श्रेय किसी को युग युग से शोषण यह चलता है l तिल तिल कर जलती बाती ही है सब कहते देखो ! दीपक जलता है ll आओ ! वेदों की ओर चलें ! -- सिद्धार्थ शर्मा , कटक

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